Friday, July 6, 2012

ऐ मेरे खुदा

ऐ मेरे मालिक, ऐ मेरे पर्वतेगार
ऐ मेरे दाता, ऐ मेरे मददगार
तेरी ऐसी फितरत है
कि पूरी दुनिया पर तेरी रहमत है
फिर भी पता नहीं दुनिया में कैसा इंसान है?
जो तेरी हर दया से अनजान है

वह तेरी भक्ति करना चाहता है पर करता नहीं
और जो तेरी भक्ति करता है वो मरकर भी मरता नहीं
ऐ अब इस दुनिया में तू नहीं केवल दौलत है
इंसान भक्ति करता है उसकी जिसकी शोहरत है
ऐ मेरे मालिक ये दुनिया कैसे अंधकार में खो गयी
पैसों के एशोआराम में सो गयी

इस दुनिया को एस नींद से जगाना है
पैसों के एस बंधन से मुक्त कराना है
ऐ खुदा कभी तो ऐसा दिन भी आएगा
 जब पूरा संसार तेरी भक्ति में लीन  हो जायेगा 

Tuesday, July 3, 2012

सीखो अपने आस-पास से


दुनिया में कुछ सीखना चाहते हो तो सीखो अपने आस-पास से
सीखो अपने हर एक अहसास से
पोधों से सीखो दूसरों के काम आना
पक्षियों से सीखो मिलकर लहराना
जब तक जिन्दगी है कभी न रुकना ये सीखो अपनी हर एक साँस से  
दुनिया में कुछ सीखना चाहते हो तो सीखो अपने आस-पास से

फूलों की तरह काँटों के साथ भी मुस्कराना
जिन्दगी में तुम रोते हुए को हँसाना
गलतियों से तुम अपने सीखो संभलना
काँटों से भी होगा तुम्हे चलना
सेवा भी करनी होगी सीखो आदर्श दास से
दुनिया में कुछ सीखना चाहते हो तो सीखो अपने आस-पास से

सच्चे प्रेम से सीखो तुम प्यार करना
दिल से दिल की आवाज पढना
खुशियों से सीखो हर गम को पीना
जिन्दगी में सीखते रहो जब तक है जीना
और यकीं करना सीखों अपने आभास से
दुनिया में कुछ सीखना चाहते हो तो सीखो अपने आस-पास से

खुदा हो आप

दुनिया में मेरे लिए खुदा हो आप
फिर क्यों इस दिल से जुदा हो आप
मेरे दिल के जहाँ में आप ही बसी हो
आप मेरे लिए दुनिया की हर ख़ुशी हो
फिर क्यों मेरे सवालों से गुमशुदा हो आप 
दुनिया में मेरे लिए खुदा हो आप

हर मन्नत पूरी हो जाये तुम्हारी
बस रब से यहीं दुआ है हमारी
ख्वालों में भी कोई आपके गम न हो
कोई भी ख़ुशी आपके लिए कम ना हो
अब तो आपका हर गम हमें मिल जाये काश
दुनिया में मेरे लिए खुदा हो आप

कदमों में आपके हो सारा जहाँ
पर कोई गम न हो वहां
हमारे लिए आप ही जन्नत हो
खुदा से मांगी गई मन्नत हो
अब तो हमारा प्यार सदा हो आप
दुनिया में मेरे लिए खुदा हो आप

जब से आपको देखा मन में ख्वाब सा जगा
आप मेरी लिए बनी हो कुछ ऐसा लगा
अब तो रब से बस यहीं चाहूं
ख्वालों में भी सदा आपको ही पाऊ
दिल करता है नजरो में आपको भर लू आज
दुनिया में मेरे लिए खुदा हो आप 

माँ नहीं पर माँ जैसी

माँ नहीं पर माँ जैसी एक नारी से मुलाकात हुई
उसके बाद फिर जीवन भर उससे मेरी हर बात हुई

माँ ने जन्म तो दिया था पर रास्ते पर ही छोड़ दिया
मेरी माँ ने माँ के फर्ज का हर रिश्ता मुझसे तोड़ दिया
माँ जैसी ही उस नारी से मेरे जीवन की शुरुआत हुई
माँ नहीं पर माँ जैसी एक नारी से मुलाकात हुई

हर एक लम्हा मेरे जीवन का उसने संवार दिया
अपने बच्चों से भी ज्यादा उसने मुझे प्यार किया
मेरे सपनों को पूरा करने का हर द्वार है वो
अब तो मेरे जीवन का पूरा संसार है वो
 उसके बाद से खुशियाँ भरी मेरे दिन और रात हुई
माँ नहीं पर माँ जैसी एक नारी से मुलाकात हुई

 उसने मेरे हर सपने को अपनी पलकों पर सहेजा है
शायद खुदा ने मेरे लिए ही उसे बनाकर भेजा है
उपरवाले से बढ़कर मेरे लिए भगवान् है वो
अब तो मेरे हर कदम की पहचान है वो
जब से वो आई मेरे जीवन में सौगात हुई
माँ नहीं पर माँ जैसी एक नारी से मुलाकात हुई

Wednesday, June 6, 2012

बहकावा

 मेरे तन को जीवन देने वाली,
साँस बार बार लौट के आती है।
पर उसमे भी उसी का ज्ञान होता है।।

बिसराना चाहता अतीत की भूलों को,
पर याद उनकी वापिस लौट आती है।
उन यादों में भी मेरे आंसूओं  का पान होता है ।।

ईश्वर  ने पंचतत्वों को एकत्र किया,
पर उसमे मोह, ममता, बासना की बू आती है।
अगर ये भी सच्चा, तो इसमें भी मान होता है।।

विश्वरचेता  ने मानव को कुटिलता सिखला दी,
इसमें इंसान की हैवानियत नजर आती है।
और आज के अंधे युग में इसका सम्मान होता है।।

रिश्ते, उम्र, परिवार ये सब तो तुक्ष्य है,
उस ब्रह्मा के इशारों से ही दुनिया चलती है।
किसी के कलेजे में दर्द हो तो किसी का रसपान होता है।।

डूबता है कोई ख़ामोशी के मंजर में,
क्योंकि दुनिया में बातों को हवा दे दी जाती है।
पता नहीं नैनो के पानी का, जब सिसक के कोई रोता है।।

बंदिशों में तन बाणी को रख सकते है मुसाफिर,
पर नैनों की भाषा में आवाज नहीं आती है।
'आज़ाद' चाहता नहीं पर किसी के ख्याल में खोता है।।

उसके चहेरे की मुस्कान, मेरे सामने का प्रदर्शन,
हृदय का पता नहीं पर ये आकर्षण की मदभाती है।
'आज़ाद' मिथ्या सब, डूब उसमे जो विषपान में सोता है।।