Wednesday, February 13, 2013

हुआ सब कुछ गुम

सोचा था, तुम्हारा मिलन खुशनसीब होगा ।
जीवन में सबसे, हसीन होगा ।।
पर ये क्या ? मैं तो अब भी यादों में जी रहा हूँ ।
पल पल तुम्हारे विरह में मर रहा हूँ ।।
मेरी नज़रे सिर्फ, तुमको तलाशती है ।
बैचैन ग़मों की दुनिया, मुझे काटती है ।।
प्रिये ! एक बार आकर मुझसे मिल तो लो ।
शायद मेरे लिए, कल हो या न हो ।।
मेरे तडफने में, दिल्लगी न करना तुम ।
'आज़ाद' अब तेरा जहाँ में, हुआ सब कुछ गम ।। 

Tuesday, October 30, 2012

खुदा की दुनिया


फूलों की खुशबू अजब निराली होती है।
मन में हो उजाला तो हर दिन दिवाली होती है।।
जो अपनी आत्मा को पाले  उसका हर प्रशन हल है।
 वर्ना पूरी दुनिया खुदा के द्वार पे सवाली होती है।।

जिसका सितारों से जड़ा हर एक अल्फाज है।
जिसकी हर एक बात में कोई राज है।।
हम, तुम या घरबार ही नहीं।
उसके लिए तो पूरी दुनिया ही मोहताज है।।

दुनिया में हर कोई खुदा नहीं होता।
और जो होता है वो कभी हमसे जुदा नहीं होता।।
हर कोई खामोश चेहरों के सवालों को समझता नहीं।
पर खुदा कभी उन चेहरों के सवालों से गुमशुदा नहीं होता।।

कौन कहता है खुदा नहीं होता, एक बार मन में झांककर तो देख।
कौन कहता है खुदा सुनता नहीं, एक बार दिल से याद कर तो देख।।
वो तेरी हर फ़रियाद पूरी करेगा,
बस एक बार उसे देखने के लिए उसे, पीछे मुड़कर तो देख।।

आँख तो सबकी है,बस देखने का  अलग तरीका है।
इन आँखों से अच्छा  देखो, बस मैंने ये सींखा  है।।
अगर कोई इन आँखों से संसार में, भरे प्यार को न देख सके,
तो उसका जीवन निर्जर कठोर, प्यार बिना फीका है।।

जैसे किसी पेड़ से पत्ती  टूट जाती है।
ऐसे ही शरीर से जान छूट जाती है।।
इस दुनिया में कोई अमर नहीं है।
ये जिन्दगी एक  दिन सबसे रूठ जाती है।।

भगवान् को समझा तो कुछ याद आया।
मैंने सारे  जहाँ को बर्बाद ही पाया।।
 ये संसार तो एक दूसरे  से बंधा है।
जब खुदा से मिला तो खुद की फितरत को आज़ाद पाया।।

इन्सान की फितरत है वायदे करने की।
खुदा की रहमत है उसे पूरा करने की।।
खुदा के बगैर कोई कुछ नहीं कर सकता।
इन्सान को जरुरत है खुदा से डरने की।।

Monday, August 20, 2012

मुझपे माँ का प्यार नहीं

मैंने माँ के प्यार को केवल सुना है देखा नहीं
कहते है माँ के प्यार की कोई रेखा ही नहीं
बोलते है माँ बच्चों की पहली गुरु होती है
बच्चों की जिन्दगी माँ से ही शुरू होती है
फिर वो बच्चे कैसे है जिन्होने माँ को देखा ही नहीं
मैंने माँ के प्यार को केवल सुना है देखा नहीं

कहते है की माँ बच्चों की भगवान् है
बच्चों के हर कदम की पहचान है
पर जिस माँ ने बच्चों को छोड़ दिया
अपना हर एक रिश्ता उनसे तोड़ लिया
क्या उन बच्चों के हाथ में माँ के प्यार की रेखा नहीं
मैंने माँ के प्यार को केवल सुना है देखा नहीं

मैंने माँ से जन्म तो लिया पर उसका प्यार नहीं
क्या माँ के बिना कहीं खुशियों का संसार नहीं
सुना है माँ से बच्चों की जिन्दगी पूरी होती है
तो फिर क्या मेरी जिन्दगी अधूरी है?
क्या मुझे फिर कभी माँ का प्यार मिलेगा ही नहीं
मैंने माँ के प्यार को केवल सुना है देखा नहीं

Sunday, August 5, 2012

मैं...

आज फिर अन्जानी  राहों पर, किसको तलाश रहा हूँ मैं?
कोई था क्या मेरा! जिसको तलाश रहा हूँ मैं?
जिन्दगी वक्त के साथ, वक्त में धंसती चली गयी,
कब कौन बिछड़ा था? उस पल को तलाश रहा हूँ मैं।।

अँधेरे के साये में, चाँद को तलाश रहा हूँ मैं,
जीवन के आइने में, जाने किसको निहार रहा हूँ मैं?
ख्वाबों के इस दरबार में, क्यों झाँख रहा हूँ मैं?
सावन के इस मौसम में, बसंत तलाश रहा हूँ मैं।।

धरती पर खड़ा हूँ, आकाश क्यों निहार रहा हूँ मैं?
फूलों के उपवन में, किस खुशबू को तलाश रहा हूँ मैं?
रोती हर दिशाओं में, क्यों आग तलाश रहा हूँ मैं?
कुरुक्षेत्र से जंगम में, सारथी तलाश रहा हूँ मैं।।

शराब के मंजर में, शबाब तलाश रहा हूँ मैं,
चंद शब्दों के आहात में, खून बहा रहा हूँ मैं,
जो थम ना सके बर्षों तक, उस अंदाज में,
तकरार से अपनी, तस्वीर बदल रहा हूँ मैं।।

नयनों के अंशुओं में, रक्त तलाश रहा हूँ मैं,
हर अभोगिन बचपन को, उजाड़ रहा हूँ मैं।
हर याद को दर्दमय, बनाता जा रहा हूँ मैं,
अपनों की ही इज्जत को, नीलाम कर रहा हूँ मैं।।

हर एक कली में, खौफ बन गया हूँ मैं,
हर एक विधवा का, कोप बन  गया हूँ मैं।
'आज़ाद ' निर्वस्त निर्लज्ज, निडर घूम रहा हूँ मैं,
बिन पाषण  धूल से, पर्वत बना रहा हूँ मैं।।  

Friday, July 6, 2012

ऐ मेरे खुदा

ऐ मेरे मालिक, ऐ मेरे पर्वतेगार
ऐ मेरे दाता, ऐ मेरे मददगार
तेरी ऐसी फितरत है
कि पूरी दुनिया पर तेरी रहमत है
फिर भी पता नहीं दुनिया में कैसा इंसान है?
जो तेरी हर दया से अनजान है

वह तेरी भक्ति करना चाहता है पर करता नहीं
और जो तेरी भक्ति करता है वो मरकर भी मरता नहीं
ऐ अब इस दुनिया में तू नहीं केवल दौलत है
इंसान भक्ति करता है उसकी जिसकी शोहरत है
ऐ मेरे मालिक ये दुनिया कैसे अंधकार में खो गयी
पैसों के एशोआराम में सो गयी

इस दुनिया को एस नींद से जगाना है
पैसों के एस बंधन से मुक्त कराना है
ऐ खुदा कभी तो ऐसा दिन भी आएगा
 जब पूरा संसार तेरी भक्ति में लीन  हो जायेगा